ओवादपातिमोक्ख (माघपूर्णिमा दिवस)

ओवादपातिमोक्ख (माघपूर्णिमा दिवस)

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ओवादपातिमोक्ख (माघपूर्णिमा दिवस)

सत्तन्नं भगवन्तानं, सम्मासम्बुद्धानं महेसिनं

                                ओवादपातिमोक्खस्स, उद्देसत्तेन दस्सिता

महापादानसुत्तन्ते, तिस्सो गाथाति नो सुत्तं

तीहि सिक्खाहि संखित, यासु बुद्धान सासनं

तासम्पकासकं धम्म, परियायं भनाम से

एवं मे सुत्त उद्दिठ्ठं खो तेन भगवता जानता पस्सता अरहता सम्मासम्बुद्धेन, ओवादपातिमोक्खं गाथाहि

‘‘खन्ती परमं तपो तितिक्खा,

निब्बानं परमं वदन्ति बुद्धा।

न हि पब्बजितो परूपघाती,

न समणो होति परं विहेठयन्तो॥

‘सब्बपापस्स अकरणं, कुसलस्स उपसम्पदा।

सचित्तपरियोदपनं, एतं बुद्धान सासनं॥

‘‘अनूपवादो अनूपघातो, पातिमोक्खे च संवरो।

मत्तञ्‍ञुता च भत्तस्मिं, पन्तञ्‍च सयनासनं।

अधिचित्ते च आयोगो, एतं बुद्धान सासन’’न्ति॥

अनेकपरियायेन खो पन तेन भगवता जानता पस्सता अरहता सम्मासम्बुद्धेन, सीलं सम्मदक्खातं समाधि सम्मदक्खातो पञ्ञा सम्मदक्खाता।

कथञ्च सीलं सम्मदक्खातं भगवता। हेट्ठिमेनापि परियायेन, सीलं सम्मदक्खातं भगवता। उपरिमेनापि परियायेन, सीलं सम्मदक्खातं भगवता। कथञ्च हेट्ठिमेन परियायेन, सीलं सम्मदक्खातं भगवता। इध अरियसावको पाणातिपाता पटिविरतो होति, अदिन्नादाना पटिविरतो होति, कामेसुमिच्छाचारा पटिविरतो होति, मुसावादा पटिविरतो होति, सुरामेरयमज्जपमादट्ठाना पटिविरतो होति। एवं खो हेट्ठिमेन परियायेन, सीलं सम्मदक्खातं भगवता। कथञ्च उपरिमेन परियायेन, सीलं सम्मदक्खातं भगवता। इध भिक्खु सीलवा होति, पातिमोक्खसंवरसंवुतो विहरति आचारगोचरसम्पन्नो, अणुमत्तेसु वज्जेसु भयदस्सावी समादाय सिक्खति सिक्खापदेसूति। एवं खो उपरिमेन परियायेन, सीलं सम्मदक्खातं भगवता।
कथञ्च समाधि सम्मदक्खातो भगवता। हेट्ठिमेनापि परियायेन, समाधि सम्मदक्खातो भगवता। उपरिमेनापि परियायेन, समाधि सम्मदक्खातो भगवता।

कथञ्च हेट्ठिमेन परियायेन, समाधि सम्मदक्खातो भगवता? इध अरियसावको वोस्सग्गारम्मणं करित्वा, लभति समाधिं लभति चित्तस्स एकग्गतं। एवं खो हेट्ठिमेन परियायेन, समाधि सम्मदक्खातो भगवता।

कथञ्च उपरिमेन परियायेन, समाधि सम्मदक्खातो भगवता? इध भिक्खु विविच्चेव कामेहि विविच्च अकुसलेहि धम्मेहि, सवितक्कं सविचारं विवेकजं पीतिसुखं पठमं झानं उपसम्पज्ज विहरति।

वितक्कविचारानं वूपसमा, अज्झत्तं सम्पसादनं चेतसो एकोदिभावं अवितक्कं अविचारां, समाधिजं पीतिसुखं दुतियं झानं उपसम्पज्ज विहरति।

पीतिया च विरागा उपेक्खको च विहरति सतो च सम्पजानो, सुखञ्च कायेन पटिसंवेदेति, यन्तं अरिया आचिक्खन्ति ‘उपेक्खको सतिमा सुखविहारी’ति ततियं झानं उपसम्पज्ज विहरति।

सुखस्स च पहाना दुक्खस्स च पहाना, पुब्बेव सोमनस्सदोमनस्सानं अत्थङ्गमा, अदुक्खमसुखं उपेक्खासतिपारिसुद्धिं चतुत्थं झानं उपसम्पज्ज विहरति। एवं खो उपरिमेन परियायेन, समाधि सम्मदक्खातो भगवता।

कथञ्च पञ्ञा सम्मदक्खाता भगवता। हेट्ठिमेनापि परियायेन, पञ्ञा सम्मदक्खाता भगवता। उपरिमेनापि परियायेन, पञ्ञा सम्मदक्खाता भगवता। कथञ्च हेट्ठिमेन परियायेन, पञ्ञा सम्मदक्खाता भगवता। इध अरियसवको पञ्ञवा होति, उदयत्थगामिनिया पञ्ञाय समन्नागतो, अरियाय निब्बेधिकाय सम्मा दुक्खक्खयगामिनिया। एवं खो हेट्ठिमेन परियायेन, पञ्ञा सम्मदक्खाता भगवता।

कथञ्च उपरिमेन परियायेन, पञ्ञा सम्मदक्खाता भगवता। इध भिक्खु इदं दुक्खन्ति यथाभूतं पजानाति। अयं दुक्खसमुदयोति यथाभूतं पजानाति। अयं दुक्खनिरोधोति यथाभूतं पजानाति। अयं दुक्खनिरोधगामिनी पटिपदाति यथाभूतं पजानाति। एवं खो उपरिमेन परियायेन, पञ्ञा सम्मदक्खाता भगवता।

सीलपरिभावितो समाधि महप्फलो होति महानिसंसो, समाधिपरिभाविता पञ्ञा महप्फला होति महानिसंसा, पञ्ञापरिभावितं चित्तं सम्मदेव आसवेहि विमुच्चति, सेय्यथीदं—कामासवा भवासवा अविज्जासवा।

भासिता खो पन भगवता परिनिब्बानसमये अयं पच्छिमवाचा—
"हन्ददानि, भिक्खवे, आमन्तयामि वो, वयधम्मा सङ्खारा अप्पमादेन सम्पादेथा"ति।

भासितञ्चिदं भगवता—
"सेय्यथापि, भिक्खवे, यानि कानिचि जङ्गलानं पाणानं पदजातानि, सब्बानि तानि हत्थिपदे समोधानं गच्छन्ति, हत्थिपदं तेसं अग्गमक्खायति यदिदं महन्तत्तेन। एवमेव खो, भिक्खवे, येकेचि कुसला धम्मा, सब्बे ते अप्पमादमूलका अप्पमादसमोसरणा, अप्पमादो तेसं अग्गमक्खायति।"

तस्मातिहम्हेहि सिक्खितब्बं—
"तिब्वापेक्खा भविस्साम, अधिसीलसिक्खासमादाने, अधिचित्तसिक्खासमादाने, अधिपञ्ञासिक्खासमादाने, अप्पमादेन सम्पादेस्सामा"ति।
एवञ्हि नो सिक्खितब्बं।

 

                ओवादपाटिमोक्खादिपाठो निट्ठितो

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